Sunday, February 6, 2011

Amake aamaar moto thakte dao

Love this song

Please let me lead my own life
I have my own space for myself
I am not bothered about what I could not achieve.
Abundance would ruin my life.


In your obscure world
If you wish, you can float like a speck of dust
I am not going to dip into the future.


My world is shattered ( Literally : the mast of my ship is shattered )
Still I am scripring my own survival tale.
I am no longer game for her midnight tantrums
So I am trying hard to get on the shore.

If one early morning you re-discover your love for me,
Dont stretch your arms for me
As I wont be there by your side.
Dont turn on the lights for me
I have got lost in the sea of humanity in this railway station.
I wont be back by the last train.


Your world is moving around your ambitions.
If you could ever squeeze out time, please ponder (over)
Whether I really feature in your scheme of affairs.
In your materialistic world,
I dont want to be treated like those vegetables withering in the cold (in fridge )
Or a speck of dust floating in a glass of water



Sunday, January 2, 2011

Ehsas

फिर तुम मुझे कैसे जिंदा पाते हो...
जब मैं रूठ जाती हूँ ,
और तब तुम मुझे अपनी जान बताते हो ,
मैं तो मर ही जाती हूँ ,
तुम मुझे कैसे जिंदा पाते हो,

जब मैं सोती हूँ तुम्हारे सीने पर सर रख कर ,
तुम पलकों पर मेरी फिर वही खवाब सजाते हो ,
मैं तो मर ही जाती हूँ ,
तुम मुझे कैसे जिंदा पाते हो,

जब तुम मेरे गले मैं बाहे डाल देते हो,और मैं खो जाती हूँ
तब तुम मेरी आँखों से उतर कर मेरे दिल मैं समां जाते हो ,
मैं तो मर ही जाती हूँ ,
तुम मुझे कैसे जिंदा पाते हो,

जब तुम मेरी चोटी बनाते हो,
और होंठों से मेरी गर्दन को सहलाते हो ,
मैं तो मर ही जाती हूँ,
फिर तुम मुझे कैसे जिंदा पाते हो,

रोज मुझे चाँद ,
और खुद को मेरा महबूब बतलाते हो,
मैं तो मर ही जाती हूँ ,
फिर तुम मुझे कैसे जिंदा पाते हो,

जब तुम अपने हाथों से बिंदिया ,
और मेरी मांग सजाते हो,
मैं तो मर ही जाती हूँ,
फिर तुम मुझे कैसे जिंदा पाते हो,

कतरा कतरा बिखर जाती हूँ रात भर तुम्हारी बाहों मे ,
फिर भी तुम मुझे सुबह तक समेट लाते हो,
मैं तो मर ही जाती हूँ,
फिर तुम मुझे कैसे जिंदा पाते हो,


रात भर मुझ पर बेशुमार प्यार लुटाते हो,
सुबह होते ही खुद को मासूम और मुझको नीलम बताते हो,
मैं तो मर ही जाती हूँ ,
फिर तुम मुझे कैसे जिंदा पाते हो


Saturday, January 1, 2011

रोज नजरे मिलती है .. और रोज क़यामत होती है

क़यामत ने कहा क़यामत से ....आशिक , उम्मीद तेरी ठीक नहीं
मुझ पर जले परवाने कितने ... जलने की कोई ताकीद नहीं

हर जलवा है मेरा क़यामत .. मुझसे रहम -औ- वफ़ा की गुजारिश ना कर
क़यामत से पहले इक और क़यामत की सिफारिश ना कर

Sunday, December 12, 2010

कौन हूँ मैं ,

A masterpiece on internet .. Source Anonymous


कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं ,
तुम कह देना कोई ख़ास नहीं .

एक दोस्त है कच्चा पक्का सा ,
एक झूठ है आधा सच्चा सा .
जज़्बात को ढके एक पर्दा बस ,
एक बहाना है अच्छा अच्छा सा .

जीवन का एक ऐसा साथी है ,
जो दूर हो के पास नहीं .
कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं ,
तुम कह देना कोई ख़ास नहीं .

हवा का एक सुहाना झोंका है ,
कभी नाज़ुक तो कभी तुफानो सा .
शक्ल देख कर जो नज़रें झुका ले ,
कभी अपना तो कभी बेगानों सा .

जिंदगी का एक ऐसा हमसफ़र ,
जो समंदर है , पर दिल को प्यास नहीं .
कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं ,
तुम कह देना कोई ख़ास नहीं .

एक साथी जो अनकही कुछ बातें कह जाता है ,
यादों में जिसका एक धुंधला चेहरा रह जाता है .
यूँ तो उसके न होने का कुछ गम नहीं ,
पर कभी - कभी आँखों से आंसू बन के बह जाता है .

यूँ रहता तो मेरे तसव्वुर में है ,
पर इन आँखों को उसकी तलाश नहीं .
कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं ,
तुम कह देना कोई ख़ास नहीं