Monday, July 5, 2010

काश

लफ्ज़ गूंजते . या फिर ख़ामोशी का असर होता
कंधे पर जुल्फे होती तो ..आज हथेलियों में ना सर होता ..
तुझसे बिचड़ के मैं हर रोज मर के जीता हूँ
तू मिलती तो.. शायद कुछ और हसर होता ..
काश यूँ होता तो क्या होता ... काश यूँ ना होता तो क्या होता ...
तू गर मिल जाती तो , मिल जाती जन्नत मुझे
पर शायद तेरे ना मिलने से, 'मीत' गम से बेखबर होता

Sunday, June 13, 2010

बदलाव



ये रुते बहार शायद खाक होने वाली हैं, आजकल बातों बातों में उसका लहजा बदल सा जाता है...



आँखों का रंग बात का लहजा बदल गया,
वो शख़्स एक शाम में कितना बदल गया !
हैरत से सारे लफ़्ज़ उसे देखते रहे,
बातों में अपनी बात को कैसा बदल गया !


हैरानगी नही मुझे इस बात पे कि कौन कितना बदल गया,
कोई शाम-ओ-सहर तो कोई मौसम कि तरह बदल गया ,
जब वक़्त ही नही रहता टिक कर कही ,
तो क्युं चर्चा हैं इसका कि कौन कितना बदल गया !

रुक जाता था लम्हा उसके तस्सवुर में;
मासूमियत उसकी वक्त को मदहोश कर देती थी !
लफ्ज होठों में सिले रहते थे ;
आँखों की बाते, मुझे खामोश कर देती थी !

हाल-ए-दिल कहूँ या सुनाऊं बेवफाई की दास्ताँ;
बदल कर 'मीत' को, वो शक्श खुद बदल गया !


जिन्दगी की राहों मे रस्ते बदल गए
रुख हवा का बदला या हमसफ़र बदल गए
सोचते है आपको याद ना करे
लेकिन आँखे बंद करते ही इरादे बदल गए


नरेश, गंगा तिवारी, प्रदीप, गुरमीत अखिल

Saturday, May 29, 2010

chand khyalat

मिलते हुए दिलों के बीच और था फैसला कोई, उसने मगर बिछड़ते वक़्त सवाल कुछ और कर दिया....



बिछड़ने का आलम कुछ ऐसा था मेरे ' मीत ', इक मोती आँखों का, सारा फ़साना कह गया
इक तेरे तब्बस्सुम के खातिर, मैं सारे दर्दो गम सह गया
ज़माने की सुन, दर्द-ए-बेबशी की आंधियो में मेरा ज़माना बह गया ,
तेरे दीदार की इत्नेजार था, कारवां निकल गया, मैं खड़ा रह गया


मुमकिना फैसलों में एक हिज्र का फैसला भी था,
हमने तो एक बात की ,'मीत' ने तो कमाल कर दिया ....
मेरे लबो पे मोहर थी पर मेरे शीशा ए रूह ने तो
शहर के शहर को मेरा वाकिफ ए हाल कर दिया .....

rawatjee

Thursday, May 6, 2010

जीत या हार

कुछ जीत लिखूँ या हार लिखूँ..या दिल का सारा प्यार लिखूँ..
कुछ अपनो के ज़ाज़बात लिखूँ या सापनो की सौगात लिखूँ..

वो पल मे बीते साल लिखूँ या सादियो लम्बी रात लिखूँ..
सागर सा गहरा हो जाऊं या अम्बर का विस्तार लिखूँ..

मै तुमको अपने पास लिखूँ या दूरी का अहसास लिखूँ..
वो पहली -पहली प्यास लिखूँ या निश्छल पहला प्यार लिखूँ..

सावन की बारिश मेँ भीगूँ या मैं आंखों की बरसात लिखूँ..
कुछ जीत लिखूँ या हार लिखूँ..या दिल का सारा प्यार लिखूँ..

Divya Prakash Dubey